शुक्रवार, सितंबर 30, 2011

nura kushati

बचपन मैं नूराकुश्ती के बारे मैं कई किस्सों मैं  इस कुश्ती का वर्णन आता था.आखिर नुराकुश्ती होती क्या है,बड़े दिनों तक समझ नहीं आया.इसका एक कारन तो यह है की मैं स्वयं बचपन मैं अखाड़े मैं जाया करता था. मैं क्या मेरी उम्र के जो वरिष्ट नागरिक हैं लगभग सभी गाँवों मैं रहने वाले अखाड़े मैं जाते रहे होंगे.अखाड़े मैं होने वाली कुश्तियों मैं या तो जीत होती थी या हारहोती थी.उस्ताद दावं सिखाते ,जिसको दावं आता और मेहनत करता उसे उस्ताद विशेष प्रशिक्षण देते.इसके लिए उन्हें कोई अलग से कोचिंग फी अदा करना नहीं पड़ती थे.उम्र के पचीस साल तक नुरा कुश्ती का नाम तक अखाड़े मैं सुनने मैं नहीं आता था.यहाँ तक की राजनीती मैं भी राजनीतिज्ञों के बीच नुरा कुश्ती का नामनिशान सुनने मैं नहीं था. मगर पिछालेदिनों नहीं पिछले २० वर्षों से इस प्रकार की कुश्ती बहुत सामान्य हो गई है. भाजपा और कटियार जी का मतभेद हुआ तो कांग्रेस वाले कहतें हैं की ये नुरा कुश्ती है. अमर्सिंघ्जी और मुलायाम्सिंघ्जी के बीच तकरार हुई तो लोग कहेंगे नुरा कुश्ती है .शरद जी कांग्रेस से अलग हुए तो नुरा कुश्ती है /इसका मतलब यह हुआ की राजनीती मैं नुरा कुश्ती आम हो गयी है.अभी अभी प्रणव दाऔर चिदंबरम  की कुश्ती को मीडिया ने खूब उछाला.मन मोहन सिंह जी ने भी जल्दबाजी नहीं की ,बोले रुको दिल्ली लौटने के बाद बात करता हूँ.मीडिया को लगा अब पहलवान लड़े.सिंह साहेब बोले रुको/सिक्किम जा कर आता हूँ.मीडिया को लगा की अब तो लड़े ही लड़े. उधर मैदान .दर्शक, मीडिया की गाड़ियाँ माइक ,फोटोवाले,केम्रामन एकदम तैयार .इधर लोगों को लगा की सर्कार अब गयी तब गई . बड़े बड़े लोग मैदान मैं हाजिर. साक्षात्कार मैं चिदंबरम जी बोले प्रणव दा मेरे  से वरिष्ट हैं मैं उनका सम्मान करता हूँ. . और उन्होंने जो कहा की इस पत्र मैं लिखे गए विचार मेरे नहीं हैं इसका मैं सम्मान करता हूँ.किस्सा यहीं समाप्त समझिये. एक मनचले ने चुटकी ली आपने तो इशिपा देने की बात कही थी ,बोले वो मुझे याद नहीं .अब मुझे समझ आया की याददाशत का कमजोर पड़ जाना,कम सुने देना,और नुरा कुश्ती मैं विशेषज्ञता किअतनी कम की चीजें हैं?

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