शनिवार, दिसंबर 24, 2011

lokpal,ke bare main.

अपने अपने जुमले हैं,अपने अपने तर्क,हंसिया हो हथोडा हो,या हो हाथी या हाथ.   लालटेन हो या कमल हो हर को हर का साथ/   ये सब साथी हैं,हम जोली हैं, नहीं है कोई फर्क./          लोकपाल के माथे पर है ,आरक्षण की टोपी. आँख पर टुटा चश्मा .पहिनने को है लाल और केसरिया कमीज,      एक हाथ मैं मंदिर की घंटी है दूजे मैं है लम्बी छड़ी ,////अंग्रेजों का सूट नहीं है पहिना, मगर गले मैं हाथी ब्रांड टाई है शानदार, /एक टांग पर केसरिया धोती  दूजी पर पायजामा  चूडीदार,एक पैर मैं चप्पल है ,दूजे मैं जूता एडीदार //////अपने अपने जुमले हैं अनपे अपने तर्क हंसिया हो या हथोडा हो ,लालटेन हो या कमल हो हर को हर का साथ,ये सब साथी हैं,हमजोली है, किसी मैं नहीं है कोई फर्क अपने अपने जुमले हैं अपने अपने तर्क.////////अन्ना का लोकपाल है बड़ा अलबेला, कानून का वो जानने वाला, हाथ मैं मैं हंटर ,पैर मैं फौजी बुट,//फ़ौज उसकी बड़ी सशक्त है ,बंद कर देगा सारी लूट ///उसे संसद या कोर्ट किसी की जरूरत नहीं पडी है ,शुरू कर देगा वह अपनी बन्दर बाँट,उसे किसी की क्या पडी है?///जब वो पूरी ताकत से हाथ मैं हंटर लेकर, कानून को जबान पे रखकर ,परमाणु सूटकेस पर उंगली रखकर दिल्ली के तखत पर बैठेगा ,तो गद्दाफी, सद्दाम हिटलर को  जमाना भूल जाएगा, और मेरे देश का अवाम आसमान ताकता रह जाएगा, ///////और तब तक अन्ना की आन्दोलन से हो जायगी छुट्टी ,किरण केजरीवाल और सिसोदिया जेल मैं पिसेंगे घट्टी,जेल मैं पिसेंगे घट्टी .///आज तक जनता को क्या फर्क पड़ा है, खड़ा है राज्जपाल,या लोकपाल नहीं किसी मैं फर्क अपने अपने.............

शुक्रवार, दिसंबर 02, 2011

post card and landline telephone

छोटे डाकघरों मैं पोस्टकार्ड औरप्रधान डाकघरों मैं जवाबी पोस्टकार्ड अनुबल्ब्ध हैं. बैंकों मैं चेक डालने के लिए जो ड्रॉप बॉक्स रखे गए हैं उस पर लिखा है की चेक डालनेवाले उपभोक्ता अपना मोबाइल क्रमांक डालें. यदि कोई सज्जन मोबाइल का उपयोग न करते हों लैंड लाइन क्रमांक डालने मैं क्या हर्ज़ है? ऐसा जब बैंक मेनेजर से पूछा गया तो उनका जवाब था की आजकल कोई भी लैंड लाइन और वह भी बे.अस.अन अल की नहीं उपयोग मैं लेता. हमारा समाज एक और तो महंगाई का रोना रोता है दुसरे इन सस्ते और सुलभ देसी कंपनियों और सरकारी विभाग के संचार साधनों का उपयोग करना ही नहीं चाहता.पोस्टकार्ड शायद दुनिया मैं सबसे सस्ता संचार का माध्यम है . सस्ते साधन के अलावा यह कई लोगों के रोजगार का जरिया भी है. इसी प्रकार लैंड लाइन फोन जो सरकारी है ,इसका बिल्लिंग सही है. यदि लैंड लाइन फोन ख़राब है ,तो इसकी शिकायत आप करिए.क्या दिक्कत है/हम लोगों को भ्रम और भटकाव मैं जीने की आदत पड़ गयी है. हम तय नहीं कर पा रहे की विदेशी कंपनियों का साकार विरोध करें की खाली माली भोंपू और शंख की तरह भेडियाधसान चिल्लाते रहें?

सोमवार, नवंबर 28, 2011

wall mart ka swagat hai /////////magar

हमारा देश सैदेव थोड़े थोड़े दिनों मैं बुखार से पीड़ित हो जाता है. कभी रामदेव . का बुखार,कभी अन्ना का बुखार, कभी चिदंबरम और वित्त मंत्री की चिट्ठी का बुखार न जाने कैसा कैसा बुखार.अभी ताजा बुखार fhir  आया है, और वह है वाल्ल्मार्ट का बुखार. किराने के खुदरा व्यापार के लिए करने के लिए सरकार ने वाल्ल्मार्ट को इक्कावन प्रतिशत पूंजी की हिस्सेदारी की निवेश की अनुमति दी है.एक बवंडर मचा है.क्या मायावती,क्या उमाभारती ,मूंदे,रशीद अल्वी, प्रणव डा आनंद शर्मा बार बार कपडे बदलकर टी वी चेनलों पर आ रहे हैं.अपने अपने तर्क प्रस्तुत कर रहें हैं.इस क्षेत्र मैं यानि खुदरा व्यापार मैं शून्य या जीरो तकनीक काम मैं आती है. विदेशी कम्पिनियाँ ऐसे क्षेत्र मैं क्यों नहीं आती.जिसमे उन्नत तकनीक काम मैं आती हो. जैसे विमानन,पनडुब्बी,कम्पुटर मिसाइल,ड्रोन हवाई जहाज आदि. किराने के खुदरा व्यापार मैं केवल पूंजी और प्रबंध चाहिए. तकनीक नहीं.  और हम न पूंजी मैं कम हैं न प्रबंध मैं कम हैं.    महिला.पुरुषों ,बच्चों के वस्त्र,तेल साबुन, बोतलबंद पानी,पेय आदि मैं तकनीक नहीं चाहिए. आज एयर इण्डिया और इंडियन एयर लाइन्स मृत शैय्या पर पड़े हैं. उपग्रह लांचिंग मैं हमें कुछ सामग्री बहार से मांगना पड़ती है ,पनडुब्बी हम विदेशों से खरीदते हैं. ड्रोन विमान हमारी कल्पना से बहार हैं,सुपर कम्पुटर हमारे यहाँ बन चूका है मगर व्यापक स्तर पर नहीं.        विदेशी कम्पनियाँ ऐसे क्षेत्रों मैं क्यों कर नहीं आती?और हमारी सरकार उन्हें क्यों नहीं बुलाती?केंचुकी  ईड चिकन,जींस,टी शर्ट ,कोकोकोला ,क्रीम आदि उत्पादों मैं इनकी जरूरत नहीं है. सरकार वाल्ल्मार्ट  और अन्य कंपनियों को बुलाये मगर पहिले तकनीक वाले क्षेत्रों मैं आमंत्रित करें /वाल्ल्मार्ट का स्वागत है मगर पहिले तकनीक वाली कम्पनियां आगे आवे.

रविवार, नवंबर 27, 2011

vaicum cleaner ke liye sthai sanyojan

रेलवे स्टेशनों पर सफाई के लिए वैक्कुम क्लीनरों का उपयोग किया जाता है.इस मशीन से सफाई करते रहने एवं कचरा खींचने मैं उर्जा और श्रम कम लगते हैं. मगर इसे चलते रहने के लिए विदुयतसंयोजन के तार एक बड़ी और भारी केबल मैं होते हैं,/इस केबल को एक सिरे से दुसरे सिरे तक खींचते रहने मैं बहुत ज्यादा परिश्रम एवं उर्जा लगती है. /अतः हो यह रहा है की सफाई कर्मचारी को इस मशीन को चलते रहने के लिए भारी,लम्बी केबल को उठाने ,खींचने ,पलटने मैं अधिक श्रम और उर्जा लगती है. जो उर्जा का एक नुकसान है. इसकी बजाय जिस तरह बल्ब, tube लाइट ,डिस्प्ले बोर्ड के लिए ऊपर स्थायी कनेक्शन होते हैं, उसी प्रकार इस मशीन के लिए भी एक स्थाई कनेक्शन दे दिया जाय और इसके साथ एक ऐकड़ी नुमा खड़ा तार जोड़ दिया जाय /ठीक उसी तरह जैसे रेल इन्जीन के साथ साथ एक ऐकड़ी चलती है और वह ऐकड़ी बिजली के संयोजन को बनाए रखती है और इन्जीन गाड़ी को खेंचता रहता है. इस युक्ति से सफाई कर्मचारी की वह उर्जा जो लम्बी,भारी केबल को खीन्चेने मैं व्यर्थ जा रही है उसका उपयोग कचरा उठाने मैं ,कचरे को खींचने मैं हो सकेगा. और श्रमिक की काम करने की दक्षता बढ़ेगी. इस विभाग के पास बिजली और यांत्रिकी के अभियंताओं की कमी नहीं हैं. जब रतलाम मंडल मैं एक हीरे की आकृति का क्रास्सिंग बन सकता है,जो कल्पना से परे है तो ऐसा बिजली संयोजन भी हो सकता है.

शनिवार, नवंबर 26, 2011

dono deshon ke nyayaadheeshon ka aabhar.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश श्री न्याय मूर्ति इफ्तेखार चौधरी की अध्यक्षता मैं बनी १७ सदस्यीय समिति एक याचिका के सन्दर्भ मैं निर्णय दिया है की पाकिस्तान के भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ जो मुकद्दमे चल रहे थे ,और बंद कर दिए गए थे वे पुनः खुलेंगे. और इन नेताओं को आम माफी भी नहीं दी जाएगी. भारत मैं भी दो गी स्पेक्ट्रम के मामले मैं कई दिग्गज नेताओं की दलील थी की इस मैं जो नुकसान बताया गया है वह ''शून्य नुकसान'',नोशनल लोस या किताबी नुकसान हैं. किन्तु माननीय न्यायालय ने इन नेताओं के तर्कों और सरकार की दलीलों पर कोई ध्यान न देते हुए शीग्र कार्रवाही करने को  कहा.परिणाम हमारे सामने हैं. कैसे करोंडो की धनराशी इस खाते से उस खाते मैं गयी?और कैसे एक के बाद एक नेता और दिग्गज तिहाड़ मैं गए. दोनों देशों के नेताओं ने कोहराम मचा रखा है. गरीब ठेलेवाला,हम्माल,आदिवासी,दिहाड़ी मजदूर चोरी करे तो वह भयंकर अपराधी.जब की उसे पेट भरने और बच्चों का इलाज करने  उनके पढाई लिखाई का इंतजाम करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है. इसे सजा,जेल,हथकड़ी, आदि आदि. और इन नेताओं को आम माफी. जो गुल्छारें उडाएँ,सोने के पलंग पर सोयें,सोने का बेल्ट पहिने.लाख दस लाख से व्यापार आरम्भ कर दस पाँच सालों मैं अरबपति हो जाएँ. इन के पास हवाई जहाज आ जाएँ .इन्हें माफी. क्या चिंतन है/दोनों देशों के न्यायमूर्ति बधाई के पात्र हैं.इन आदरणीय न्याय मूर्तियों ने दोनों देशों की जनता के साथ न्याय तो किया ही है ,उन्हें एक अन्धकार मैं प्रकाश का मार्ग बताया है.

गुरुवार, नवंबर 17, 2011

pranav DA vastav main DA

कांग्रेस नीट यु.पी.ए२ केग की रिपोर्ट से परेशां है.इस रिपोर्ट के प्रभाव से कई दिग्गज राजनीतिग्य और औध्योगिकघरों के रसूखदार लोग तिहाड़ जेल मैं बंद है. सरकार की विश्व नीयता और नीयत पर संदेह की निगाह से देखा जा रहा है. हालाँकि ऐसी बात नहीं है.फिर भी केग की वार्षिक वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए प्रणव मुखर्जी ने केग की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा है की केग ने अपने उत्तरदायित्व को निभाया.कार्यकुशलता से कम किया और कर्तव्य को पूरा किया. जहाँ एक और कई नेता केग द्वारा इंगित किये गए नुकसान को किताबी नुकसान या नोशनल लोंस बताते हैं वहां प्रणव दा केग की तारीफ करतें हैं.प्रणव दा वित्तमंत्री हैं/सरकार मैं नम्बर २ पर हैं/कांग्रेस और सरकार के संकट मोचक हैं/कई समितियों के अध्यक्ष हैं/मंत्री समूहों की समिति के अध्यक्ष हैं/किन्तु इन सब पदों से ऊपर उठकर वे प्रणव दा हैं. वास्तव मैं प्रणव जी ''दा'' हैं./

बुधवार, नवंबर 16, 2011

computer,kishor aur dimag aur praudh

बेल्जियम के घेंट विश्व विद्यालय के शोध वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन मैं पाया की कम्पुटर पर बड़ी देर तक खेल खेलने वाले किशोरों की दिमागी रचना अलग किस्म की होती है. इनका दिमाग तार्किक होता है. अध्यन से यह पता चलना शेष है कि ये गेम खेलने से दिमाग तार्किक होता है या पहिले से तार्किक गेम वाले यह खेल खेलना पसंद करतें हैं/ इम्पेरिअल कालेज लन्दन के डाक्टर बौडेन जोंस का कहना है कि यह अध्यन स्नायु और नसों सम्भंधी बिमारियों के निदान मैं कारगर होगा. डाक्टरों ने प्रौढ़ों को सलाह दी है कि वे कम्पुटर पर बैठे  ता कि उनके दिमाग कुंद,चिडचिडे और भुल्भुले न हों.हो सकता है ऐसे शोध हमारी पीढी को मददगार साबित हो.