सोमवार, नवंबर 07, 2011

ubharte grameen vidhylay.

छोटे छोटे गांवों मैं कई माध्यमिक और उच्य्तर माध्यमिक विद्यालय हैं. इन सुविधाविहीन शालाओं मैं अधोसंरचना की कमी है. खेल का मैदान नहीं है,पीने के पानी नहीं है, बरसात मैं छत मैं से पानी गिरता है. आदि आदि. ऐसा एक गाँव रतलाम के निकट है. छोटासा गाँव सेजावता. यहाँ के बच्चे और शिक्षक बहुत परिश्रमी. जहाँ रतलाम जिला मुख्यालय के हाई स्कूल का परीक्षा परिमाण पचास /साठ तक मुश्किल तक पहुँच पता है वहां इस गाँव के स्कूल का परीक्षा परिमाण ९८/१०० प्रतिशत तक रहता है. अभी मध्य प्रदेश मैं राषट्रीय जनसँख्या मिशन द्वारा भोपाल मैं एक  राज्य स्तरीय रोल प्ले स्पर्धा आयोजित की गयी .सेजावता की छातराओंने इसमें भाग लिया.लघु नाटिका का विषय था ''जीत एड्स से ''इस नाटिका के लेखक हैं  रतलाम के युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर  और नाटिका का निर्देशन किया यहाँ की विज्ञानं शिक्षिका विनीता ओझा ने. उल्लेखनीय यह है की मध्य प्रदेश के ३८ मैं से छतीस UTKRASHAT  विद्यालय इस स्पर्धा मैं भाग लेने आये थे .इन ऊँचे दर्जे के विद्यालयों से टक्कर लेने के लिए एक अदना सा विद्यालय और वह भी स्पर्धा मैं प्रथम स्थान .पर आया. अब ये छात्राएं अखिल भारतीय स्तर पर भाग लेने हेतु १७ नवम्बर को कोयम्बतूर को प्रस्थान करेंगी. ऐसे विद्यालय,नाटिका के लेखक .नाटिका की निर्देशिका बधाई के पात्र हैं .ऐसे लोगों का सम्मान प्रदेश स्तर पर होना चाहिए.विनीता ओझा विज्ञानं और हिंदी की शिक्षिका भी है. और इन विषयों का परीक्षा परिमाण भी लगभग १०० प्रतिशत होता है. संभाग आयुक्त  (रेवेन्हु) ने ऐसे विद्यालयों को अपने संभाग मैं विशेष स्थान देकर उनकी अधोसंरचना के लिए शासन से अलग से आबंटन मंजूर करवाना चाहिए. ऐसे विद्यालयों को अलग से ग्राडिंग देकर और चिन्हित कर उनकी एक विशेष दर्जे की सूचि मैं नाम हों. ता की जब शासन की आबंटन की योजनायें आये तो उन्हें जिलाधिकारियों के विवेक पर निर्भर न रहते हुए अपने आप इसका लाभ मिल जाये. साथ ही जिस प्रकार पुलिस मैं गंभीर अपराधियों को पकड़ने पर पदोन्नति देने का प्रावधान है इसी प्रकार ऐसे प्रतिभावान शिकशों को पद्दों नाती नहीं तो कम से कम एक वेतन वृद्धि का तो प्रावधान हो.

bharat ki sahbhagita nahee

मंगलग्रह पर जाने की तैय्यारी के क्रम मैं पांचसौ बीस दिन तक एक स्टील टुब मैं ४/ ७ लोगों को रकः गया. हालाँकि यह मिशन बहुत महंगा था. इसकी आलोचना भी हुई. किन्तु उल्लेखनीय यह है की इस मिशन मैं भारत के वैज्ञानिकों की कोई सहभागिता नहीं ली गयी. भू मंडली करण के दौर मैं वैज्ञानिक प्रयोगों मैं विकास शील देशों के युवकों की सहभागिता भी ली जानी चाहिए. विदेशी कम्पनियां हमारे देश मैं शून्य यांत्रिकी (जीरो टेक्नोलोजी)के उद्योगों मैं बढचढ कर भाग लेती हैं. जैसे बिसलेरी के पानी ,केन्चकी चिकन, साबुन तेल ,शेम्पो आदि. किन्तु अन्तरिक्ष ,और वैमानिकी के क्षेत्र मैं  हमारे लोगों को प्रशिक्षित भी नहीं करती और न हमें वह ज्ञान ही प्रदान करती है. हमें हमारा रास्ता खुद ही खोजना होगा.

मंगलवार, अक्टूबर 18, 2011

juta,chappal,ghunsa culture

जूता ,चप्पल,घूंसा और लात संस्कृति आजकल बड़ी प्रचालन मैं है/ प्रशांत भूषण को लात से मारो.केजरीवाल  पर चप्पल का प्रयोग करो, आदि आदि .उधर विधानसभाओं मैं माइक,कुर्सी फेंको,गंदे और असंसदीय इशारे करो. यह प्रजातान्त्रिक देश के लक्षण नहीं. चरवाक ने पुनर्जनम के सिध्हांतकी खिल्ली उड़ाई ,राजाशाई होते हुए भी किसी राजा ने चर्वक पर कोई कारवाही नहीं की. फिर प्रजातंत्र मैं ये बातें कैसे हो रही हैं/सत्ताईस रूपये के पीछे दिल्ली मैं हत्या हो जाती है,चाय ,नाश्ता के मामूली सवालों पर मारपीट .? हमारे समाज को हो क्या गया है. सहनशीलता .शांति ,सब कहाँ चली गयी. क्या हमारे धर्मोपदेशक सही सन्देश देने मैं असमर्थ हैं? क्या ये मठादिश केवल बड़े बड़े मठ बनाने,पत्रिकाएं निकालने ,धर्म के नाम पर केवल संपत्ति इक्कठी करने को ही धर्म समझ बैठे हैं? भगवान जाने  इस जगदगुरू कहलाने वाले देश का क्या होगा.

शुक्रवार, सितंबर 30, 2011

nura kushati

बचपन मैं नूराकुश्ती के बारे मैं कई किस्सों मैं  इस कुश्ती का वर्णन आता था.आखिर नुराकुश्ती होती क्या है,बड़े दिनों तक समझ नहीं आया.इसका एक कारन तो यह है की मैं स्वयं बचपन मैं अखाड़े मैं जाया करता था. मैं क्या मेरी उम्र के जो वरिष्ट नागरिक हैं लगभग सभी गाँवों मैं रहने वाले अखाड़े मैं जाते रहे होंगे.अखाड़े मैं होने वाली कुश्तियों मैं या तो जीत होती थी या हारहोती थी.उस्ताद दावं सिखाते ,जिसको दावं आता और मेहनत करता उसे उस्ताद विशेष प्रशिक्षण देते.इसके लिए उन्हें कोई अलग से कोचिंग फी अदा करना नहीं पड़ती थे.उम्र के पचीस साल तक नुरा कुश्ती का नाम तक अखाड़े मैं सुनने मैं नहीं आता था.यहाँ तक की राजनीती मैं भी राजनीतिज्ञों के बीच नुरा कुश्ती का नामनिशान सुनने मैं नहीं था. मगर पिछालेदिनों नहीं पिछले २० वर्षों से इस प्रकार की कुश्ती बहुत सामान्य हो गई है. भाजपा और कटियार जी का मतभेद हुआ तो कांग्रेस वाले कहतें हैं की ये नुरा कुश्ती है. अमर्सिंघ्जी और मुलायाम्सिंघ्जी के बीच तकरार हुई तो लोग कहेंगे नुरा कुश्ती है .शरद जी कांग्रेस से अलग हुए तो नुरा कुश्ती है /इसका मतलब यह हुआ की राजनीती मैं नुरा कुश्ती आम हो गयी है.अभी अभी प्रणव दाऔर चिदंबरम  की कुश्ती को मीडिया ने खूब उछाला.मन मोहन सिंह जी ने भी जल्दबाजी नहीं की ,बोले रुको दिल्ली लौटने के बाद बात करता हूँ.मीडिया को लगा अब पहलवान लड़े.सिंह साहेब बोले रुको/सिक्किम जा कर आता हूँ.मीडिया को लगा की अब तो लड़े ही लड़े. उधर मैदान .दर्शक, मीडिया की गाड़ियाँ माइक ,फोटोवाले,केम्रामन एकदम तैयार .इधर लोगों को लगा की सर्कार अब गयी तब गई . बड़े बड़े लोग मैदान मैं हाजिर. साक्षात्कार मैं चिदंबरम जी बोले प्रणव दा मेरे  से वरिष्ट हैं मैं उनका सम्मान करता हूँ. . और उन्होंने जो कहा की इस पत्र मैं लिखे गए विचार मेरे नहीं हैं इसका मैं सम्मान करता हूँ.किस्सा यहीं समाप्त समझिये. एक मनचले ने चुटकी ली आपने तो इशिपा देने की बात कही थी ,बोले वो मुझे याद नहीं .अब मुझे समझ आया की याददाशत का कमजोर पड़ जाना,कम सुने देना,और नुरा कुश्ती मैं विशेषज्ञता किअतनी कम की चीजें हैं?

मंगलवार, सितंबर 27, 2011

१०० सेकण्ड और १०० दिन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड केमरून ने भारत के खिलाड़ियों को उनके यहाँ होने वाले ओलम्पिक मैं भाग लेने हेतु र्हदय से आमंत्रित किया है.कमरून ने यह भी कहा है की भारतीय उद्योगपति भी आमंत्रित हैं.आपने अपने देश की तारीफ़ करते हुए कहा है की यहं उद्योग और निवेश की अपार सम्भावनाये हैं. ब्रिटेन मैं १०० सेकण्ड मैं एक कम्पनी जनम लेती है. हमारे भारत मैं १०० से. तो ठीक १०० दिन मैं उद्योग या निवेश करने का विचार तक नहीं आ सकता. हम ब्रिटेन से अभी भी १०० साल पीछे हैं. बाबा रामदेव,अन्ना ,२जी घोटाला आदि से सर्कार को फुर्सत ही नहीं .एक के बाद एक विषिस्टव्यक्ति कारावास मैं जा रहे हैं.देश का एक तिहाई हिस्सा भयंकर वर्षा से ग्रस्त है.सिक्किम मैं भूकंप है. उमरअब्दुल्ला मेहमान नवाजी मैं मस्त हैं.राहुलजी सिक्किम का हवाई दौरा कर सिक्किम वासियों का दर्द समझने की कोशिश कर रहें हैं.जब की फ़ौज के लोग कह रहें हैं की अति विषिस्ट और सुरक्षा प्राप्त विषिस्ट व्यक्तियों को सिक्किम नहीं आना चाहिए. उधर मोदीजी का उपवास समाप्त हुआ है.केमरू  न जी आप बेफिक्र रहें आपके यहाँ हमारे उद्योगपति निश्चित आयेंगे.

मंगलवार, सितंबर 20, 2011

उपवास

गुजरात मैं ३ दिनी उपवास का समारोह समाप्त हुआ. सांसद,नेता,सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मगुरु,मंच पर  हाजिर.उधर सिक्किम मैं जमीन से २० की.मी.नीचे भूगर्भीय हलचल से सड़क,पूल,नष्ट.कई मकानऔर जाने गयीं.भोजन ,दवाएँ ,आवास,पूर्ति मैं कठिनाई. गुजरात मैं मंच पर हाजिर विशिस्ट मैं से सिक्किम मैं जाने का साहस किसी मैं नहीं .वहां आईटीबीपी ,बीअस्फ़  के जवान प्राण हथेलियों पर रखकर तैयार.विशेष राहत शिविरों मैं पीड़ितों को संभवतया सहायता उपलब्ध की जा रही है. गुजरात के वर्त्तमान और भू,पू. मुख्य मंत्री के उपवास का विरोध और समरथन करने वालों मैं से कितने विशिष्ट जन सिक्किम पहुंचेंगे /

शुक्रवार, सितंबर 16, 2011

trust /nishta

सड़क किनारे बैठकर गाड़ियों की ताले की चाबी बनाने वाले कारीगर के चार बेटे. चरों बेटे अपनी पत्नियों के साथ पिता के साथ रहते हैं.बड़े दिन क्या सालों के बाद मैं इस आदमी से मिला.जिग्याशावशपूछा  मकान वकान बनाया की नही? वह बोला सर.मेरे पिता कहते थे ''कर लिया सो काम'',भज लिया सो राम ''. मैंने २० वर्ष पूर्व एक प्लाट ले लिया था.उसी पर जरूरत पुरता माकन बना लिया है.चरों बेटों के अलग अलग कमरे हैं.मैं उसे ठगा सा देक्खता और सुनाता रहा. इस आदमी को अपने पिता पर .भगवान पर और अपनी संतानों पर कितना विश्वास ''. दूसरी और मेरे सफेदपोश नौकरशाह दोस्त.एक और दो पुत्रों को अच्छा पढ़ा लिखा दिया मकान बनाकर दिया.फिर भी सपूत ऐसे की अलग रहतें हैं यहाँ तक तो ठीक है.लड़ते अलग हैं.इन लोगों को न तो अपने पिता पर,न अपने पुत्रों पर विश्वास है और न इन्हें भगवान के बहन पर भरोसा है.क्या हमारा प्रगतिशील कहलाने वाला समाज इन मामूली से काम कर अपनी जीविका चलाने वाले लोगों से कुछ सीखेगा./