गुरुवार, सितंबर 15, 2011

hindi divas par vishesh

कंप्यूटर के क्षेत्र मैं हिंदी मैं लिखने की बड़ी दिक्कत थी.कई लोगों ने परिश्रम किया ,ता की आम आदमी हिंदी मैं कुछ लिख सके कुछ पढ़ सके.एक लम्बी सूचि है ऐसे हिंदी साधकों की. इस सूचि मैं एक नाम रवि रतलामी है है जो हिंदी का सच्चा साधक है.यह व्यक्ति अक सेवानिव्र्रत अभियंता है. स्वास्थके हिसाब से सामान्य/ मगर जीवटऔर कर्तृत्व  का धनी.गजब का धुनी.मेरे जैसे आलसी आदमी को संगणक सीख लेने ,ब्लॉग को हिंदी मैं लिखने की प्रेरणा देने वाला अकिंचन हिंदी साधक. हर शहर मैं ऐसे २/४ आदमी हो जाएँ तो हिंदी जगत का विकास होगा. रविजी पेशे से इंजिनियर ,शिक्षा दीक्षा अंग्रेजी मैं हुई किन्तु हिंदी के सच्चे सेवक.इन्हें न किसी पुरस्कार की दरकारहै और न किसी पद की चाह है. इस ब्लॉग पर हिंदी मैं लिखते समय मैं रोमांचित हो जाता हूँ.औए इसका श्रेय मैं रविजी को देता हूँ.

रविवार, सितंबर 11, 2011

ganesh visarjan

   .       ,    गणेश विसर्जन के बाद नदियों मैंप्रदुषण बढ़ जाता है/मछलिया मर कर उप्पर आ जाती हैं/ ऐसा गतवर्ष पुष्करमैंहुआ था/ हमारे धर्माचार्य जो रत दिन जीव हिंसा कीनिंदा  करतें हैं क्यों नहीं इस विसर्जन के बारे मैंअपनी राय व्यक्त करते हैं?हम लोग कट्टरपंथी नहींहैं/हमसुधार वादी हैं/जिन परम्पाराओं से हमारे जीवजगत को और जैव विविधता को नुकसान पहुंचता हो उन्हें सुधार लेने मैंक्या हर्ज़ है? गंनपतिबप्पा कीमूर्ति कितनी भी बड़ी बने ,मगर उस पर बजाय तेज रसायन के  हर्बल या जैविक रंगों का प्रयोग करें तो क्या हर्ज़ है? धर्माचार्य अपने प्रवचनों मैं ऐसी महत्वपूर्ण औरपर्यावरण सुधारकी सीखदें तो कितना पुण्य कर्म होगा ?

evil sprits

   ..        .            लगभग हर धर्म मैं आसुरी शक्तियों का उल्लेख आता है/ सनातन धर्म मैं आसुरी शक्तियां, इस्लाम मैंशैतान के बारे मैं जिक्र इसाई धर्ममैं एविल स्प्रिट ,बुद्ध धर्ममैं मार काउल्लेखहै/इसका तात्पर्य हरेक धर्म मैंआसुरीशक्तियां अनिवार्यता लिए हुए हैं.हरसमय मैंआसुरीशक्तियोंने  आम आदमियों केजीवन को कष्ट दिया है.क्याकभी ऐसा होगा की आसुरीशक्तियोंसे हमें छुटकारा मिल जावे/

शुक्रवार, सितंबर 09, 2011

pakistan mai hinduon ki sthiti

.    .  /    भारतमैं,मुस्लिम भाइयों मैं ऊँचे दर्जे केकलाकार, चित्रकार, खिलाडी ,अभिनेता ,उधोगपति , राजनयिक हैं तथा ,बिना भेदभाव केउन्हें अछे अवसर मिलते हैं/ पाकिस्तान मैं  कोई हिन्दू इस काबिल नहीं  की दो चार नाम लेने के लिए भी हों?पाकिस्तान केनेताओं को समझ लेना चाहिए की किसी टेलेंट की उपेक्षा देश केहितों केलिए ठीक नहीं

मंगलवार, मार्च 10, 2009

पक्षियों की मानव के प्रति संवेदना

सनातन धर्म और उससे संबधित जैन,बौओद्ध,सिक्ख धर्मों ने अहिंसा और करुना का संदेश दिया है.वह कितना महत्त्व पूर्ण है इस बात से मालूम होता है की पशु,पक्षी इसलिए करुना के पात्र नाहीं हैं की वे पर्यावरण चक्र को संतुलित करतें हैं बल्कि वे मानव की संवेदना को समझतें भी हैं।
गावों मैं देखा गया है की किसी परिवार मैं अमंगल घटना घटित हो जाने पर पालतू गाय ,बैल,कुत्ता २;३ दिन दाना पानी छोड़ देतें हैं.ये तो आम हैं.किंतु कोई बीमार हो जे और पालतू पक्षी उसकी पीड़ा को अनुभव कर .हल बतावें यह अजूबा देखने को मिला है,मेर्रिलंद मैं.मेर्र्य्लेंद के एक श्र्रेमन ब्रायन विल्सन नाम के आदमी को एक दुर्घटना मैं घाटक rउप से लगी। और उनका बोलना बंद होगया। ब्रायन के घर मैं पालतू तोता मैना थे। ये महाशय उनके सामने बैठ जाते.बस तोता मैना उनसे बात करते। बतियते.हर रोज यही क्रम .एक दिन अचानक ब्रायन के मुह से एक शब्द फुटा,दूसरा फुटा तीसरा फुटा और वे बोलने लग गए। अब उनके घर मैं ८० परिंदे है। धन्य हैं हमारे सनातन धर्म ,जैन बौद्ध और सिक्ख धर्मों के महँ गुरुओं की एक लम्बी श्रंखला ,जिसने करुना की देशना दी है.

रविवार, दिसंबर 07, 2008

kutoon ke sath bharteey nahee balki neta कुत्तों के संग भारतीय जनता नही ,बल्कि नेता ////////

कुत्तों के संग भारतीय जनता नही ,बल्कि नेता ////////बापू दक्षिणी अफ्रीका मैं रेल से यात्रा करते समय धकेल दिए गए थे .भारतीयों और कुत्तों को रेल की उस विशेष श्रेणी मैं यात्रा की अनुमति नही थी. अब आजादी के ६० साल बाद हालत बदली है.कुत्ते तो वहीं हैं.रेल की जगह रेल्ली है ,और जनता की जगह नेता हैं/यह घटना हुई है ,मुंबई मैं /आतंकवाद के खिलाफ निकली रैली मैं एक पोस्टर पर लिखा था ""इस रैली मैं कुत्तों और नेताओं को आने की अनुमति नही है.नेताओं अब चेतो/जनता ४० किलो का हार भी पहिनाती है ,और वही जनता जूतों की माला भी पहिना सकती है.

ham uttardayee gauohatya ke .aur poojen devon ko उत्तरदायी गौओ हत्या के ,और पूजें हम देवों को ------------

उत्तरदायी गौओ हत्या के ,और पूजें हम देवों को ------------
आजकल मूर्तियाँ ,गाय की हड्डियों से निर्मित होने लगी हैं.यह वस्तिकता प्रकाश मैं लाई हैं प्रसिद्द पशुप्रेमी और पर्यावरणविद मेनकाजी गाँधी.आम,सत्ता सुख भोगनेवाले नेताओं से अलग हस्ती मेनकाजी का कहना है की आकर्षक मूर्तियाँ बने ,इसके लिए स्वस्थ गायों को कत्लखानों में भेजकर ,हड्डियाँ निकलकर ,शोधन के लिए भेजी जातीं हैं.और राम,दुर्गा,कृषण की मूर्तियाँ बनाकर बेचीं जाती हैं.बिकरी मैं इजाफा तब होता है,जब नवरात्री,रामनवमी आदि उत्सव आते हैं.उत्पादकों का कहना है की ये हड्डियाँ गाय की नही बल्कि ऊंट की हैं/क्या तर्क है?अव्वल तो हड्डियों से मूर्तियाँ बने ही क्यों?मेनकाजी का कहना है की देश मैं ऊँटों की इतनी आबादी ही नही है की इतनी मात्र मैं मूर्तियाँ बन सके.मई शंकराचार्यों.,प्रवचनकारों से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ की भोलीभाली जनता को इस प्रकार की मूर्तियों की पूजा करने से रोकने की सीख देन/